केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफ़नामा दाख़िल किया है कि रोहिंग्या शरणार्थी देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा हैं, इस लिए सरकार की ओर से इन शरणार्थियों को उनके देश भेजने की प्रक्रिया का समर्थन किया जाए।
ज्ञात रहे कि भारत ने अपना यह पक्ष सुप्रीम कोर्ट की ओर से रोहिंग्या मुसलमानों को डिपोर्ट के मोदी सरकार के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई पेटीशन क सुनवाई के दौरान सामने आया है। यह याचिका दिल्ली में रहने वाले दो रोहिंग्या नागरिकों की ओर से दायर की गई थी जो छह साल पहले म्यांमार के पश्चिमी गांव से भाग निकलने में सफल हुए थे।
भारत सरकार ने रोहिंग्या मुसलमानों को उनके देश म्यांवार वापस ढकेलने का फ़ैसला एसे समय किया है जब म्यांमार की सेना और चरमपंथी बौद्ध रोहिंग्या मुसलमानों का जनसंहार कर रहे हैं और चार लाख से अधिक शरणार्थी भाग कर बांग्लादेश पहुंचे हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ ने म्यांमार की सेना की कार्यवाही को नसली सफ़ाया घोषित किया है।
भारत सरकार के घटक कट्टरपंथी हिंदूवादी संगठनों की ओर से बार बार मांग उठ रही है कि रोहिंग्या मुसलमानों को उनके देश वापस भेजा जाए।
