भारत बंद: हिंसक प्रदर्शन में 10 की मौत, मायावती बोलीं- हम मोदी सरकार को घुटने टेकने पर मजबूर करेंगे

SC/ST एक्ट में बदलाव के विरोध में देशभर में हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं. अलग-अलग राज्यों से हिंसक घटनाओं की खबरें है. इस दौरान मध्य प्रदेश के ग्वालियर और मुरैना में चार लोगों की मौत हो गई है. पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार और मध्य प्रदेश में कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने ट्रेनें रोक दी हैं और हाइवे जाम कर दिए हैं. बंद को देखते हुए पंजाब में सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं. किसी भी इमरजेंसी की आशंका के चलते सेना और अर्धसैनिक बलों को तैयार रहने को कहा गया है. चूंकि पंजाब में सर्वाधिक दलित आबादी है, ऐसे में यहां बंद का सबसे ज्यादा असर हो सकता है, इसलिए राज्य के सभी स्कूलों और पब्लिक ट्रांसपोर्ट सर्विस को बंद रखा गया है. पंजाब सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि रविवार शाम 5 बजे से राज्य में इंटरनेट सर्विसेज बंद कर दी गई हैं, ताकि सोशल मीडिया पर किसी भी तरह की अफवाह को बढ़ावा न मिले. सीबीएसई ने राज्य में आज होने वाली 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं पोस्टपोन कर दी हैं.

गृह मंत्रालय का कहना है कि वह भारत बंद के दौरान जिन राज्यों में हिंसा हुई है वह उन सभी राज्यों के संपर्क में है. एमपी, यूपी, पंजाब ने केंद्र से मदद मांगी है, इन राज्यों को केंद्र की तरफ से पूरी सहायता दी जा रही है. RF और CPF की टुकड़ियां भेजी गई हैं. प्रभावित राज्यों को कानून व्यवस्था कायम रखने के लिए कहा गया है.

भारत बंद में 10 लोगों की मौत हुई है, फिलहाल घायलों की संख्या को लेकर पुष्टि नहीं हुई है. कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं. पुलिस अब भी सड़कों पर तैनात है और शांति स्थापित करने की कोशिश में जुटी है.

दलित प्रदर्शन को लेकर बसपा सुप्रीमो मायावती प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रही हैं. उन्होंने कहा कि गैर-सामिजिक तत्व दलितों के प्रदर्शन को हिंसक बना रहे हैं. विभिन्न राज्यों में दलित व अन्य पिछड़े वर्गों की उपेक्षा की जा रही है. दलित, बीजेपी से नाराज हैं. दलितों के लिए बनाए गए 1989 के एक्ट को बेअसर करने की नरेंद्र मोदी सरकार और महाराष्ट्र सरकार की कोशिश ने दलितों को आंदोलित कर दिया है.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट करके कहा, “AAP SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के बारे में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से उत्पन्न हुई स्थिति में SC/ST समाज के आंदोलन के साथ है. केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में याचिका के लिए देश के जाने माने वरिष्ठ वकीलों लगाए व एक्ट की जरूरत और उसकी मूलभावना को संरक्षित रखा जाए.”

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