नोटबंदी के बाद आई रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने 21 हज़ार करोड़ रुपये खर्च कर सिर्फ़ 16 हज़ार करोड़ रुपये बचाए. यानी सिर्फ 16 हज़ार 50 करोड़ रुपये के नोट वापिस बैंक नहीं आए.
सरकार का कहना है कि नोटबंदी पैसों को ज़ब्त करने की कोशिश नहीं थी बल्कि इसका उद्देश्य कैश इकोनोमी कम कर उसे डिजटल का तरफ ले जाना,टैक्स देने वालों की संख्या बढ़ाना और काले धन से लड़ना था.
अरुण जेटली का कहना है कि जिन लोगों ने अपने कार्यकाल में कालेधन के ख़िलाफ़ एक भी कदम नहीं उठाया उन्हें नोटबंदी का मकसद समझ नहीं आएगा.
सरकार ने नोट बंदी पर 21,000 करोड़ खर्च किये और 16,000 करोड़ बचाए’
