JNU में ‘इस्लामिक आतंकवाद’ कोर्स का प्रस्ताव पारित, छात्र संगठनो ने किया विरोध

जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय (जेएनयू) के अकादमिक परिषद ने शुक्रवार को ‘इस्लामिक आतंकवाद’ नाम के कोर्स का प्रस्ताव ‘पारित’ किया।

शुक्रवार को जेएनयू अकादमिक परिषद की 145वीं बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा अध्ययन केंद्र की स्थापना का प्रस्ताव पारित किया जिसमें ‘इस्लामिक आतंकवाद’ कोर्स भी शामिल है।

जेएनयू शिक्षक संघ के एक सदस्य सुधीर कुमार सुथर ने कहा कि ‘इस्लामिक आतंकवाद’ कोर्स को लेकर कई सदस्यों ने आपत्ति जताई है।

सुथर ने कहा, ‘कई सदस्यों ने ‘इस्लामिक आतंकवाद’ विषय का विरोध किया और कहा कि आतंकवाद को किसी धर्म के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि इसे ‘धार्मिक आतंकवाद’ कहा जाय।’

सुथर ने कहा कि प्रस्ताव को पारित कर दिया गया है और आपत्तियों पर भी विचार किया जाएगा।

मीटिंग में शामिल एक अन्य सदस्य ने कहा, ‘कई सदस्यों ने समर्थन देकर मीटिंग में इस मुद्दे पर डिबेट किया और कहा कि यह वैश्विक स्वीकार्य प्रक्रिया है और आतंक के अधिकतर मामले धर्म से जुड़े हुए हैं।’

इस प्रस्ताव का ड्राफ्ट अफ्रीकन अध्ययन केंद्र के प्रोफेसर अजय कुमार दुबे की अध्यक्षता में चार सदस्यों की कमेटी ने की थी।

जेएनयू छात्र संघ ने प्रशासन के इस प्रस्ताव का विरोध किया है।

जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष गीता कुमारी ने कहा, ‘जेएनयू वीसी ने राष्ट्रीय सुरक्षा अध्ययन केंद्र के अंदर ‘इस्लामिक आतंकवाद’ विषय का आदेश दिया जो कि बहुत ही अचंभित और समस्या पैदा करने वाला है।’

गीता कुमारी ने कहा, ‘इस्लामोफोबिया का यह विकृत प्रोपेगैंडा एकेडेमिक कोर्स के नाम पर लाना गहरी समस्या पैदा करने जैसा है। सामान्य तौर पर आतंकवाद को पढ़ाने के बदले ऐसा लगता है कि इन विषयों के जरिये आरएसएस-बीजेपी चुनावी एजेंडा तैयार कर रही है।’

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