मायावती का बंगला: 113 करोड़ रुपए हुए थे खर्च, फर्श में लगा है इटालियन मार्बल, लाल चुनार पत्थरों की हैं दीवारें

मायावती 13-ए माल एवेन्यू के जिस बंगले में रहती थी उसकी भव्यता देख किसी की भी आंखें चौंधिया जाएं। लाल चुनार पत्थरों वाली चमचमाती दीवारें, इटालियन मार्बल फ्लोरिंग। आकर्षक भित्ती चित्र, छतों से लटकते बेशकीमती दमकते झूमर। इस दमक को सलीके से किए गए रोशनी प्रबंधों ने और भव्य बना दिया था। बड़े से भूभाग पर तैयार यह बंगला किसी महल सा नज़र आया..। राज्य संपत्ति विभाग के मुताबिक इसे बनाने में बसपा के कार्यकाल में करीब 113 करोड़ रुपये खर्च हुए थे।

शायद यह पहला मौका रहा होगा जब इस बंगले के हर हिस्से तक मीडियाकर्मी पहुंचे। अभी तक मीडिया में अफसरशाही की चर्चाओं के आधार पर जानकारियां सामने आई थीं। या फिर यदाकदा बसपा नेता गुपचुप तरीके से इसकी भव्यता का जिक्र करते थे। मायावती ने पत्रकारों को पहली बार अंदर बुलाया तो ऐसी कोई जगह नहीं थी जहां मीडिया के कैमरों को क्लिक न गूंज रही हो।

मायावती खुद ही बंगले के एक-एक हिस्से को दिखा रही थीं और उसके कांशीराम से जुड़ाव के किस्से सुनातीं रहीं…। प्रेसवार्ता के दौरान मायावती ने खुद ही कहा कि वह चाहती हैं कि मीडिया कांशीराम यादगार विश्राम स्थल (13-ए माल एवेन्यू ) के परिसर का भ्रमण करें और फोटोग्राफी भी करें…।

बंगले में स्थित कांशीराम के भव्य विश्राम कक्ष, लाइब्रेरी, मीटिंग हाल, रसोई व जलपान कक्ष, मीटिंग रूम, स्टोर, प्रतीक्षा कक्ष, सफाई तथा रखरखाव कर्मी कक्ष के साथ ही मायावती का अद्भुत विश्राम कक्ष, रसोई एवं भोजनालय कक्ष। हर वस्तु देखते ही बनती थी…। इतनी सफाई कि दूर-दूर तक एक तिनका तो दूर धूल या कोई धब्बा भी कहीं नहीं दिखता…। दीवारों की पत्थरों के रंग और मार्बल फ्लोरिंग एकतार नजर आए।

मुख्य परिसर स्थित म्यूरल (भित्ती चित्र) स्थल-एक और दो, पीछे बरामदे में लगे दो म्यूरल देखते ही बन रहे थे। कांशीराम के जीवन पर बने ये भित्तीचित्र कांसा, पीतल और तांबे के मिश्रण से बने प्रतीत हो रहे थे। कलाकार ने अपनी पूरी प्रतिभा इन भित्तीचित्रों में उतार रखी है।

मायावती ने बंगले में स्थित छोटी बैठकें, लिफ्ट का हिस्सा, मीटिंग हाल के साथ ही खुले परिसर में स्थित पांच हरे भरे स्थलों को दिखाया। स्वागत कक्ष और कंट्रोल रूम के बारे में भी बताया। मीडिया को परिसर में स्थित कांशीराम के साथ खड़ी अपनी भव्य प्रतिमा भी दिखाई। बताया कि कांशीराम की वसीयत के अनुसार ही उनकी एकमात्र उत्तराधिकारी के रूप में उनकी प्रतिमा भी साथ में लगी है। परिसर में बारादरी, दर्शक सुविधा स्थल तथा हाथियों की गैलरी का अवलोकन भी कराया। रोशनी के बीच सतरंगी फुव्वारे…। सफाई इतनी थी कि कोई चाह कर भी गंदगी ना फैलाए।

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