मैट्रिक और इंटर परीक्षा में अत्यधिक खराब रिजल्ट वाले स्कूलों के शिक्षक, प्रधानाध्यापक व शिक्षा विभाग के अधिकारियों को जबरिया सेवानिवृत्ति (सीआरएस) दी जाएगी। खासकर वैसे अधिकारी व शिक्षक जिनकी उम्र 50 वर्ष से अधिक है। गुरुवार को सीएम सचिवालय के संवाद कक्ष में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया।
नई सरकार गठन के बाद विभागवार समीक्षा के पहले दिन मुख्यमंत्री ने उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा समेत राज्य के आलाधिकारियों के साथ तीन घंटे की मैराथन बैठक की। इसमें शिक्षा में सुधार के लिए कई अहम निर्देश दिए। स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना में बैंकों के असहयोग को देखते हुए रजिस्टर्ड सोसाइटी बनाने का निर्देश भी दिया। कहा कि पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना लागू रहेगी। गणित, विज्ञान, अंग्रेजी के शिक्षकों की कमी को देखते हुए पायलट परियोजना के तहत ई-लर्निग की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही रिटायर्ड शिक्षक, इंजीनियरों से भी अतिथि शिक्षक के रूप में काम लिया जाएगा।
मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह ने बताया कि शिक्षा विभाग की कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर मैट्रिक व इंटर में खराब रिजल्ट वाले स्कूलों के शिक्षक व अफसरों पर कार्रवाई का निर्णय लिया गया है। 50 वर्ष से अधिक उम्र वालों की सेवा समाप्त की जाएगी। उन्होंने सीआरएस दी जाएगी। पूर्व में लिए गए निर्णय के तहत तीन बार फेल कर चुके शिक्षकों की भी सेवा समाप्त होगी।
नीतीश सरकार का फैसला: छात्रों का रिजल्ट ख़राब तो शिक्षक-प्रिंसिपल की होगी छुट्टी
