ठीक उसी समय जब क़तर का बायकाट करने वाले चार अरब देशों की बहरैन में महत्वपूर्ण बैठक शुरू होने जा रही है क़तर के अलजज़ीरा टीवी चैनल ने एक नया मुद्दा उठा दिया है जो इससे पहले अलजज़ीरा या किसी भी अन्य टीवी चैनल ने नहीं उठाया था।
अलजज़ीरा टीवी चैनल ने कहा है कि मक्का और मदीना के दोनों पवित्र स्थलों काबा और मस्जिदुन्नबी को राजनिति से अलग कर दिया जाए।
हमें इस बारे में कोई बहस नहीं करनी है कि सऊदी अरब और क़तर के विवाद का इस साल हज के दौरान क़तरी हाजियों पर नकारात्मक असर ज़रूर पड़ेगा, इसलिए कि सऊदी प्रशासन ने क़तर से उड़ान भरने वाले विमानों के जिद्दा जाने पर रोक लगा दी है अतः क़तर के हाजियों को अगर हज करना है तो पहले वह किसी और देश में जाएं और फिर वहां से सऊदी अरब जाएं। हमें इस बिंदु के बारे में बहस करनी है कि क़तर का ताक़तवर मीडिया चैनल अलअजज़ीरा ने बहुत आगे जाकर यह मांग की है कि दोनों पवित्र स्थलों को राजनीति से अलग कर दिया जाना चाहिए यानी हज की पूरी प्रक्रिया को सऊदी प्रशासन के नियंत्रण से बाहर निकाल दिया जाना चाहिए। यह मांग वास्तव में सऊदी अरब के अधिकारियों के ख़िलाफ़ युद्ध के एलान से कम नहीं है।
अलजज़ीरा टीवी चैनल की इस डिबेट का साफ़ मतलब यह है कि क़तर के विचार में सऊदी प्रशासन के पास दोनों पवित्र स्थलों के संचालन की योग्यता नहीं है। क़तर के इस विचार को अगर दूसरे इस्लामी देशों का समर्थन मिलने लगा तो यह बहुत बड़ा परिवर्तन होगा।
सऊदी अरब से गहरे विवाद के बीच बहुत कम ही देश एसे हैं जिन्होंने इस प्रकार का कोई विचार पेश किया है। कर्नल मुअम्मर क़ज़्ज़ाफ़ी के शासन काल में लीबिया ने यह मांग की थी और इसी तरह ईरान ने यह मुद्दा उठाया था कि इस्लामी देशों की स्वतंत्र कमेटी बने जो सऊदी अरब में स्थित पवित्र स्थलों के देखभाल की ज़िम्मेदारी संभाले जिस तरह वैटिकन में होता है। लेकिन इन प्रस्तावों को सऊदी प्रशासन ने कड़ाई से ख़ारिज कर दिया।
हमें यह नहीं मालूम कि अलजज़ीरा टीवी चैनल पर जो मांग उठी है वह क़तर की नई रणनीति है या यूं ही ज़बान पर आ जाने वाली बात है या फिर क़तर ने सऊदी अधिकारियों को चेतावनी दी है कि अब आगे वह और भी बड़े क़दम उठाने जा रहा है। लेकिन इतना तो तय है कि यह प्रस्ताव क़तर सऊदी अरब विवाद और भी भड़का देगा।
यहां यह सवाल उठता है कि क्या क़तर की सरकार ने यह मुद्दा उठाने से पहले इस बारे में अपने घटक देशों तुर्की और ईरान से समन्वय बना लिया है या नहीं?
इस सवाल के दो कारण हैं एक तो यह कि हमें मालूम है कि यह कितना ख़तरनाक मुद्दा है और इससे वर्तमान संकट और भी जटिल हो जाएगा इसलिए कि तुर्की और ईरान तो पहले से ही यह मांग कर रहे हैं कि काबा और मस्जिदुन्नबी की देखभाल की ज़िम्मेदारी इस्लामी देशों को संयुक्त रूप से दी जानी चाहिए। अब क़तर की ओर से भी यही मांग सामने आई है तो यह देश निश्चित रूप से इसका समर्थन करेंगे।
