सेटलाइट तस्वीरों में, जिन्हें ह्यूमन राइट्स वॉच ने सोमवार को प्रकाशित किया, राख़ीन राज्य में सुरक्षा बलों और बौद्धधर्मियों के हमलों में बहुत से गांव आग में झुलसे नज़र आ रहे हैं।
अब तक 73000 से ज़्यादा रोहिंग्या मुसलमान बंग्लादेश फ़रार कर चुके हैं लेकिन राख़ीन से प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, कम से कम 30000 रोहिंग्या मुसलमान पहाड़ी क्षेत्रों में फंस गए और उनके पास खाना-पानी और दवाएं नहीं हैं।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हज़ारों की संख्या में म्यांमार की मुसलमान महिलाएं और बच्चे पहाड़ों और जंगलों में फंसे हुए हैं। वे लकड़ियों और पत्तों से बने अस्थायी शरण स्थल में ज़िन्दगी गुज़ार रहे हैं।
ह्यूमन राइट्स वॉच ने म्यांमार से पर्यवेक्षकों को राख़ीन प्रांत में जाने की इजाज़त देने की मांग की है।
फ़िलिस्तीन के इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हमास ने भी सोमवार की रात एक बयान में रोहिंग्या मुसलमानों के ख़िलाफ़ अपराध की भर्त्सना की है।
इससे पहले इस्लामी गणतंत्र ईरान और हिज़्बुल्लाह रोहिंग्या मुसलमानों के ख़िलाफ़ अपराध की निंदा कर चुके हैं।
म्यांमार के मुसलमानों के इस देश की सरकार और बौद्धधर्मियों के हाथों जारी जनसंहार पर दुनिया के अनेक देशों में आक्रोश फूट पड़ा है।
पिछले शुक्रवार से अब तक पश्चिमी म्यांमार के राख़ीन राज्य में मुसलमानों के ख़िलाफ़ इस देश की सेना के दमनकारी हमलों में 400 से ज़्यादा लोगों का जनसंहार हुआ है।
2012 से रोहिंग्या मुसलमानों पर म्यांमार की सेना और चरमपंथी बौद्धधर्मियों के हमले जारी हैं।
म्यांमार में10 लाख रोहिंग्या मुसलमान, नागरिक अधिकार से वंचित हैं।
बंग्लादेश की सीमा पर 30000 रोहिंग्या मुसलमान खाना-पानी और दवा के बिना भटकते हुए
