Expresslivenews.com (Edited By:Sardar Husain)
दारुल उलूम के नाम से कथित फतवा मीडिया में सामने आने के बाद में अब इस फतवे के झूठ होने की खबर सामने आई, लेकिन सोशल मीडिया पर ये फतवा बड़ी तेज़ी से सर्कुलेट हो रहा है। इसी को लेकर दिल्ली के जामा मस्जिद इलाके में शिया-सुन्नी इफ्तार कराया गया। और इस इफ्तार के जरिए मोहब्बत का पैगाम दिया गया ।
दिल्ली की संस्था शोल्डर टू शोल्डर के तहत ये इफ्तार प्रोग्राम एवान-ए-शाही रेस्तरां में रविवार शाम आयोजित हुआ, इफ्तार की तैयारी कर रहे इर्तजा कुरैशी ने बताया कि पता नहीं फतवा सच है या नहीं, अगर ऐसा कुछ फतवा आता भी है तो हम उसके खिलाफ हैं। घर में शौहर-बीवी, भाई, बहन, मां-बाप सबकी अलग-अलग राय होती है। इसका मतलब ये नहीं कि जिनकी राय अलग है, वो आपस में दुश्मनी पाल लें। एक दूसरे से नफरत करें। इर्तजा ने बताया कि इफ्तार एक साथ करने के बाद शिया-सुन्नी लोगों ने शिया आलिम के पीछे एक साथ नमाज़ भी अदा की । शोल्डर टू शोल्डर एक कैंपेन है, जो लोगों को साथ मिलकर रहने की अपील करता है। ये कैंपेन कभी क्रिसमस पर तो कभी दिवाली पर भी होता है।
इस इफ्तार के बारे में इतिहासकार राना सफवी ने बताया कि नफरत किसी का भला नहीं करती। ये इफ्तार भाईचारे की अपील है। इबादत करने के लिए घर हैं, इबादतगाह हैं। जब बाहर किसी से मिलो तो इंसानियत जिंदा रहे। सब मोहब्बत से रहें। अगर ऐसा कोई फतवा आया है तो वो नफरत को बढ़ाने के सिवा किसी को कुछ नहीं देता। मोहब्बतों को कायम करने के लिए ऐसे आयोजन होने चाहिए, क्योंकि हम सब एक हैं, कोई किसी का दुश्मन नहीं।
