भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार क़रार दिया है।
सुप्रिम कोर्ट 9 जजों की बेंच ने सर्वसम्मति से ये फ़ैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश जे एस केहर की अध्यक्षता वाली नौ सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा कि निजता का अधिकार मौलिक अधिकारों की श्रेणी में आता है। इस फ़ैसले के बाद देश के किसी भी नागरिक की निजी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकेगी। सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले के बाद आधार, पैन, क्रेडिट कार्ड में दी गई जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया जा सकेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ‘निजता’ की सीमा तय करना संभव है। सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला आधार योजना के खिलाफ दायर याचिका पर दी है। वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद केन्द्र सरकार को झटका लगा है।
ज्ञात रहे कि निजता के अधिकार का मामला तब सामने आया जब कई सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए सरकार ने आधार कार्ड को अनिवार्य कर दिया था। याचिका में आधार योजना की वैधता को इस आधार पर चुनौती दी गई थी कि यह निजता के अधिकार का उल्लंघन है।
