तालेबान गुट ने एक बयान जारी करके इस गुट के बारे में रियाज़ के हालिया रुख़ पर प्रतिक्रिया जताई है और कहा कि सऊदी अरब तालेबान को आतंकी गुट बता कर उसके साथ अफ़ग़ानिस्तान की सरकार की वार्ता प्रक्रिया में रोड़े न अटकाए। काबुल में सऊदी अरब के दूतावास के प्रभारी द्वारा तालेबान को आतंकी गुट बताए जाने के बाद इस गुट ने कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए सऊदी अरब को धमकी दी है।
तालेबान ने अपने बयान में कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान पर इस गुट के शासन के समय तालेबान से सऊदी अरब के बड़े अच्छे संबंध थे और वह उन सबसे पहले देशों में से एक था जिन्होंने तालेबान की इस्लामी सरकार को औपचारिक रूप से स्वीकार किया था। बयान में गया है कि एेसे समय में जब अमरीका के नेतृत्व में अफ़ग़ानिस्तान पर क़ब्ज़ा कर लिया है और अफ़ग़ान राष्ट्र उसके चंगुल से छुटकारे की कोशिश कर रहा है तो हमारी अपेक्षा यह है कि सऊदी अरब अफ़ग़ानिस्तान के अतिग्रहण को समाप्त करवाने के लिए सकारात्मक भूमिका निभाएगा।
अंतर्राष्ट्रीय मामलों के एक विशेषज्ञ अब्दुश्शकूर सालंगी का कहना है कि सऊदी अरब ने अपनी अपार क्षमताओं के बावजूद अब तक अफ़ग़ानिस्तान में नकारात्मक भूमिका ही निभाई है। उनका कहना है कि तालेबान गुट पर सऊदी अरब का काफ़ी प्रभाव था और दूसरी ओर उसके पाकिस्तान से भी निकट संबंध हैं और सबसे बढ़ कर यह कि वह अफ़ग़ानिस्तान के भीतर चरमपंथी गुटों के विचारों को बदल सकता है लेकिन उसने कभी भी इस सिलसिले में कोशिश नहीं की है।
