लोकसभा चुनाव में बीजेपी का साथ देगा शिया मुसलमानों का संगठन “राष्ट्रीय शिया समाज” ‘RSS’, लेकिन शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद ने कहा कि बुक्कल नवाब और उनके साथियों ने जो फैसला लिया है, वह उनकी निजी राय है

र्ष 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय शिया समाज (आरएसएस) ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का साथ देने का ऐलान किया है. आरएसएस के अध्यक्ष भाजपा विधान परिषद सदस्य बुक्कल नवाब ने बताया कि शिया मुसलमान अगले लोकसभा चुनाव में बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का साथ देंगे. हम अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के पक्ष में हैं.

नवाब ने कहा कि बीजेपी को छोड़कर दूसरा कोई भी दल शिया मुसलमानों के हितों का ख्याल नहीं रखता है. इस लिहाज से इस बार भी यह कौम बीजेपी और मोदी का साथ देगी.

बुक्कल नवाब ने कहा कि बीजेपी ने ही केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी, प्रदेश के राज्यमंत्री मोहसिन रजा, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष ग़यूरुल हसन, उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हैदर अब्बास जैसे शिया मुसलमानों को अहम ओहदों पर बैठाया

नवाब ने आरोप लगाया कि प्रदेश की पूर्ववर्ती सपा और बसपा सरकारों ने शिया मुसलमानों को प्रताड़ित किया. बसपा प्रमुख मायावती के राज में खुद उन्हें जेल में डाला गया था. वहीं, सपा के शासनकाल में उसके नेता आजम खां ने शिया समुदाय को सताने की हर मुमकिन कोशिश की. बाकी सियासी पार्टियों के रवैये को देखते हुए शिया समुदाय ने इस बार भाजपा का साथ देकर उसकी जीत सुनिश्चित की.
इस बीच, ऑल इण्डिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना यासूब अब्बास ने अगले लोकसभा चुनाव में शिया मुसलमानों द्वारा बीजेपी का साथ दिए जाने के बुक्कल नवाब के बयान पर कहा कि वह अभी इस बारे में कुछ नहीं कहना चाहते. यह एक संवेदनशील मामला है. वह उलेमा से राय लेकर ही इस बारे में कुछ कह सकेंगे.

वहीं शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद ने कहा कि बुक्कल नवाब और उनके साथियों ने जो फैसला लिया है, वह उनकी निजी राय है. बाकी शिया समाज ने वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में किसी दल को समर्थन देने का अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है. उन्होंने कहा कि उलेमा के साथ बैठक करके सलाह-मशविरे के बाद ही इस बारे में कोई निर्णय लिया जाएगा.

याद रहे कि कुछ दिन पूर्व दारुल उलूम देवबंद से एक फतवा जारी हुआ था जिस में कहा गया था कि “शिया हज़रात के यहाँ इफ्तार पार्टी में शिरकत करना या उन के यहाँ शादी की पार्टी में जा कर खाना खाना जाइज़ नहीं” उक्त शिया संगठन के जन्म को इस फतवे के जवाब में भी देखा जा रहा है

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