अमेरिकी विदेशमंत्रालय ने हर साल की भांति इस साल भी आतंकवाद के समर्थक देशों के बारे में रिपोर्ट प्रकाशित की है। इस रिपोर्ट में आतंकवाद के समर्थक देशों की जो सूचि तैयार की गयी है उनमें ईरान, सीरिया और सूडान का भी नाम है जबकि रोचक बात यह है कि विश्व के हर देश से अधिक स्वयं अमेरिका आतंकवादी गुटों का समर्थन करता है और उनके गठन में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
मौजूद प्रमाण इस बात के सूचक हैं कि वर्ष 1980 के दशक में अमेरिका की खुफ़िया एजेन्सी सीआईए ने रूसी सेना से मुक़ाबले के लिए अलक़ायदा को बनाया था और इस समय उसने आतंकवादी गुट दाइश को बनाया ताकि अमेरिका के अनुसार पश्चिम एशिया के क्षेत्र में ईरान और शीयों के बढ़ते प्रभाव से मुकाबला किया जाये।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इस देश की पूर्व विदेशमंत्री हिलैरी क्लिंटन ने बारमबार कहा है कि दाइश को बनाने में इस देश के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की सीधी भूमिका थी।
अमेरिकी पत्रिका “कल्चर वार्स” के प्रधान संपादक माइकल जोन्ज़ कहते हैं” मध्यपूर्व के संबंध में अमेरिका की विशेष स्ट्रैटेजी है और आतंकवाद के संबंध में अमेरिकी विदेशमंत्रालय की रिपोर्ट का आधार वाशिंग्टन का विशेष दृष्टिकोण है न कि वास्तविकता।
वह आगे कहते हैं” अमेरिका क्षेत्र में छद्म युद्ध कर रहा है और इसीलिए वह इस युद्ध में आतंकवादियों का प्रयोग कर रहा है। जैसाकि परिवर्तनों के इतिहास ने दर्शा दिया है कि छद्म युद्ध का परिणाम यह होता है कि यही आतंकवादी उन देशों के लिए मुसीबत बन जाते हैं जिन्होंने उनका समर्थन किया है।
अमेरिका आतंकवाद के समर्थक देश सऊदी अरब और जायोनी शासन का समर्थन करता है जिसके कारण वह आतंकवाद के संबंध में कुछ बोलने के लाएक़ नहीं है।
अमेरिका एक ओर आतंकवाद की समर्थक सरकारों के साथ वित्तीय और हथियार संबंधी सहायता को ख़त्म करने की बात करता है और दूसरी ओर वह सऊदी अरब के साथ कई सौ अरब डॉलर के समझौतों पर हस्ताक्षर करता है।
बहरहाल इस बात में कोई संदेह नहीं है कि अमेरिकी विदेशमंत्रालय ने आतंकवाद से मुकाबले के संबंध में जो रिपोर्ट प्रकाशित की है उसका लक्ष्य अमेरिकी हितों को आगे बढ़ाना है और अगर अमेरिका वास्तव में आतंकवाद के समर्थकों का नाम प्रकाशित करना चाहता तो सबसे पहले स्वयं अमेरिकी विदेशमंत्रालय की रिपोर्ट में उसका नाम सर्वोपरि होता
